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Kashipur: घरों में प्रसव करने वाली महिलाओं का चिन्हित कर होगी कार्रवाई

हीरा मेहरा Updated Thu, 26 Jun 2025 01:24 PM IST

अलग प्रसव कक्ष नहीं होने से काला पीलिया बीमारी से ग्रसित गर्भवतियों के लिए सरकारी अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। संज्ञान में होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग अस्पताल में व्यवस्था कराने को तैयार नहीं है। स्वास्थ्य विभाग घरों में प्रसव करने वाली महिलाओं को चिन्हित कर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय में एक ऑपरेशन थिएटर और एक प्रसव कक्ष है। यहां सर्जरी, प्रसव आदि होते हैं। काला पीलिया जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित गर्भवतियों के प्रसव के लिए अस्पताल में अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। नगर के निजी अस्पतालों में भी ऐसे मरीजों को कम ही भर्ती किया जाता है। इस कारण प्रसव के दौरान नवजात एवं अन्य के बचाव के लिए ऐसे मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। साथ ही इमरजेंसी के समय गर्भवतियों का चिकित्सक की देखरेख में स्टाफ नर्स एहतियात बरतते हुए प्रसव कर देती हैं। सामान्य तौर पर इस प्रकार का प्रसव कर सफाई करके 24 घंटे कक्ष बंद रखना पड़ता है। महिला रोग विशेषज्ञों के मुताबिक महीने में पांच-छह केस काला पीलिया के आ रहे हैं। पहले यह संख्या नाममात्र थी। सूत्रों ने बताया कि प्रसव में कुछ समय होने पर गर्भवतियों को अस्पताल से हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में मंडराने वाले कुछ दलाल उन्हें गुमराह करके अप्रशिक्षित महिलाओं से प्रसव कराने के लिए कई केंद्रों पर ले जाते हैं। जहां वह सावधानी बरते बिना भी प्रसव करती रहती हैं। इसके बदले वह मोटी रकम वसूलती हैं। इससे बीमारी के क्षेत्र में पैर पसारने की संभावना बढ़ रही है। ऐसे केंद्रों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

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