अंतर्गत मयाली–गुप्तकाशी मोटर मार्ग पर स्थित जाखणी कक्ष संख्या 6 में आरक्षित वन क्षेत्र में आग लगाने की घटना संज्ञान में आई है। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि आरोपी दीपक लाल (निवासी: खलियान बांगर, वर्तमान निवास: ललूड़ी, जखोली, रुद्रप्रयाग) द्वारा जानबूझकर वन क्षेत्र में आग लगाई गई, जो समय रहते नियंत्रित न किए जाने पर बड़े वनाग्नि का रूप लेकर आपदा जैसी स्थिति उत्पन्न कर सकती थी। वन विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया गया है तथा उसे माननीय डीएफओ न्यायालय में प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रकरण में भारतीय वन (उत्तरांचल संशोधन) अधिनियम, 2001 जिसके तहत आरक्षित वन में आग लगाने पर 6 माह तक का कारावास अथवा जुर्माना या दोनों का प्रावधान है, की धारा 26 के अंतर्गत कार्यवाही की जा रही है, जिसके तहत आरक्षित वन में आग लगाने पर 6 माह तक का कारावास अथवा जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 एवं आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के अंतर्गत भी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें 1 वर्ष या उससे अधिक का कारावास एवं जुर्माना शामिल है, तथा वन संपदा को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति भी आरोपी से वसूल की जाएगी। इस कार्रवाई में वन दरोगा प्रकाश कंडारी एवं वन बीट अधिकारी आशीष रावत सम्मिलित रहे। वन विभाग आमजन से अपील करता है कि वनाग्नि रोकथाम में सहयोग करें तथा ऐसी किसी भी घटना की सूचना तत्काल विभाग को दें।