घोलतीर के मवाणा गांव में रेलवे निर्माण कार्य से प्रभावित भवनों के मुआवजे को लेकर सोमवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने रेलवे निर्माण स्थल पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और मुआवजे में अनियमितता का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि सर्वे होने के बावजूद कई प्रभावित परिवारों के नाम अंतिम मुआवजा सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। वहीं कई प्रभावितों को मुवावजा राशि नुकसान के अनुरूप नहीं दी गई है। ग्रामीणों ने बताया कि वे सुबह आठ बजे से ग्रामीण प्रशासनिक अधिकारियों का इंतजार करते रहे, लेकिन न तो कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही कंपनी का कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि। महिला मंगल दल अध्यक्ष सरिता देवी ने बताया कि सर्वे के अनुरूप मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। कई प्रभावित परिवारों को सूची से बाहर रखा गया है। वहीं मुवावजे के नाम पर चार सौ और आठ सौ तक रूपये रखे गए हैं। निर्माण कार्यों से प्रभावित मोहन असवाल ने कहा कि रेलवे निर्माण से उनके मकान को भी नुकसान पहुंचा, लेकिन उनका नाम अंतिम सूची में नहीं है। उन्होंने मुवावजे के लिए किए गए सर्वे को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है। मामले पर मवाणा क्षेत्र पंचायत सदस्य सतीश राणा ने आरोप लगाया कि रेलवे निर्माण कार्य में लगी कंपनी पहले भी मनमानी करती रही है। अब भवनों को हुई क्षति का भी सही आकलन नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि अंतिम सूची में कई लोगों को 400 और 800 रुपये तक का मुआवजा राशि रखी है, जिससे क्षति की भरपाई संभव नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि सभी प्रभावितों को उचित मुआवजा नहीं मिला तो ग्रामीण बड़ा आंदोलन करेंगे। उधर, दोपहर बाद रेलवे निर्माण में लगी कंपनी के अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत का प्रयास किया, लेकिन लोगों ने प्रशासन की मौजूदगी में ही वार्ता करने की बात कही। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक प्रशासन पूरे मामले में हस्तक्षेप कर समाधान नहीं निकालता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।