उत्तराखंड में हजारों बाहरी लोग फर्जी तरीके से स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनाकर सरकारी नौकरी या अन्य संस्थानों में नौकरी हासिल कर रहे हैं। साथ ही प्रदेश में हजारों एकड़ जमीन की अवैध खरीद फरोख्त कर बाहरी लोगों ने कब्जा किया है। यह खुलासा किया यूकेडी के शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी ने। उन्होंने कहा कि पर्वतीय प्रदेश के लोगों की जमीन और हक-हकूक बचाने के लिए यहां मूल निवास और सशक्त भू कानून लागू होना चाहिए। इन मांगों पर यूकेडी 24 अक्तूबर को देहरादून में महारैली का आयोजन करेगी। सोमवार को यूकेडी के शीर्ष नेता और पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी ने पत्रकार वार्ता कर कहा कि राज्य गठन से पूर्व यूपी में मूल निवास लागू था। इसे उत्तराखंड में बंद कर दिया गया। स्थायी निवास प्रमाण पत्र की व्यवस्था लागू की गई। हजारों बाहरी लोगों ने फर्जी तरीके से स्थायी निवास प्रमाण बनाकर प्रदेश के स्थायी निवासियों के हकों पर डाका डाला है और सरकार इससे बेखबर है। कई लोगों ने फर्जी निवास प्रमाण बनाकर सरकारी संस्थानों में नौकरी तक हासिल की है। प्रदेश में बाहरी लोगों ने हजारों एकड़ जमीन खरीदी है। अवैध तरीके से जमीन की खरीद-फरोख्त हो रही है और यह सिलसिला लगातार जारी है जो गहरी चिंता का विषय है। ऐसे में प्रदेश में सशक्त भू-कानून लागू होना चाहिए ताकि यहां के मूल निवासियों के हितों की रक्षा हो सके। उन्होंने कहा कि यदि बड़े अस्पताल, शिक्षण संस्थान सहित अन्य जनहित के संस्थान खोलने के लिए बाहरी लोग जमीन की खरीद करते हैं तो इसका निर्णय शासन स्तर पर लेना चाहिए। इन मुद्दों को लेकर यूकेडी 24 अक्तूबर को देहरादून में महारैली का आयोजन कर सरकार को नींद से जगाने का काम करेगी।