गंगा दशहरा के पावन अवसर पर आज सिद्ध पीठ डांडा नागराजा मंदिर में भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा की शुरुआत हुई। सैकड़ों भक्तों, विशेषकर महिलाओं ने देवप्रयाग के गंगा घाट पर पवित्र स्नान करके पीत वस्त्र धारण किए और सिर पर कलश लेकर यात्रा में भाग लिया। यात्रा भागीरथी और अलकनंदा के संगम से प्रारंभ होकर रघुनाथ मंदिर लक्ष्मी नारायण मंदिर और देवप्रयाग नगर की परिक्रमा करते हुए बैंजण गाँव होते हुए डांडा नागराजा मंदिर पहुँचेगी। श्रद्धालुओं द्वारा ढोल दमाऊं की थाप और गंगा मैया के जयकारों के साथ पूरा नगर गुंजयमान रहा। कथा वाचक नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को जीवन का सही उद्देश्य और दिशा प्रदान करती है। उन्होंने कहा जहां भी भागवत कथा होती है, वहां दुष्ट प्रवृत्तियाँ समाप्त हो जाती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस कथा को सुनने से जन्म-जन्मांतर के विकार नष्ट होते हैं और आध्यात्मिक उन्नति होती है।