नैनीताल में व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति ठप होने से न केवल बड़े होटलों के किचन प्रभावित हुए हैं, बल्कि शहर की स्ट्रीट फूड वेंडर्स के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कारोबारियों ने इमरजेंसी कोटे के तहत सिलेंडर देने की मांग की है। दूसरे देशों में चल रहे युद्ध ने नैनीताल को एक अनचाही ''''खामोशी'''' की गिरफ्त में कर दिया है। यह खामोशी उन रेस्टोरेंट्स की रसोइयों की है जहां से उठने वाली लजीज व्यंजनों की खुशबू अब गायब हो चुकी है। वजह है व्यावसायिक गैस सिलेंडरों का ''''अदृश्य'''' हो जाना। पश्चिम एशिया के तनाव ने नैनीताल के किचन की आग बुझा दी है, जिससे अब पर्यटकों की थाली और कारोबारियों की जेब, दोनों खाली नजर आ रही हैं। मल्लीताल से तल्लीताल तक कई मशहूर रेस्टोरेंट्स ने शटर डाउन कर दिए हैं। इसके अलावा जो कुछ खुले हैं उनके भी आधे गिरे शटर इस संकट की गवाही दे रहे हैं। जिनके पास थोड़ा बहुत स्टॉक बचा था, उन्होंने अपने मेन्यू कार्ड को ''''छोटा'''' कर दिया है। मोमोज, चाऊमीन और तवा रोटियों जैसे ज्यादा गैस खपत वाले व्यंजनों को ''''नॉट अवेलेबल'''' कर दिया है।