भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का शीत जल मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक हंगरियन स्टेरियन कार्प मछली पर शोध कार्य करेंगे। चंपावत की ठंड में हंगरियन मछली का गहन अध्ययन किया जाएगा। केंद्र में तीन से पांच लाख के फर्टीलाइज अंडों की डिमांड दी है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का शीत जल मात्स्यिकी अनुसंधान केंद्र के प्रायोगिक मत्स्य केंद्र मुड़ियानी में अब इंडियान कार्प के साथ ही हंगरियन स्टेरियन कॉमन कार्प की उत्पादन पर भी काम किया जाएगा। ठंडे पानी की मछली का फार्म में गहन परीक्षण और अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद सफलता मिलने पर इसके उत्पादन पर काम किया जाएगा। अप्रैल 2026 तक मिलने वाले अंडों को फर्टीलाइज कर काम किया जाएगा। केंद्र के प्रभारी डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि हंगरियन स्टेरियन कार्प मूलरूप से ठंडे पानी की मछली है। वह चंपावत के मौसम के अनुकूल खुद को कैसे डालेगी। केंद्र के तालाब में इन पर बारीकी से अध्ययन किया। जाएगा। उन्होंने बताया कि हंगरियन स्टेरियन कार्प की ग्रोथ अन्य मछलियों के मुकाबले अच्छी है। कम समय में मत्स्य पालकों को अच्छा उत्पादन मिलेगा। उत्पादन क्षमता कम होने के चलते मत्स्य पालकों को लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि हंगरियन स्टेरियन कार्प छह में ग्रोथ कर जाती है। जबकि अन्य मछली करीब एक से डेढ़ साल का समय होता है।