चंपावत में काफल व्यवसाय से जुड़े परिवारों के लोग काफल को 200 से 300 रुपये किलो दर से बेचते हैं। मुड़ियानी क्षेत्र में टोकरी और कटोरे के हिसाब से काफल दिया जाता है। उनके पास तोलने के लिए कोई मशीन नहीं होती है। वाहन के रुकते ही काफल बेचने वाले तुरंत दौड़ लगा देते हैं। काफल कारोबारी मोहन चंद्र पांडेय ने बताया कि मुड़ियानी क्षेत्र के जंगल में जाकर करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद काफल को तोड़ा जाता है। फिर इसके बाद एनएच किनारे बैठकर बेचा जाता है। उन्होंने बताया कि मई और जून माह में परिवार के लोग काफल बेचकर लाखों की आय कर लेते हैं, इससे परिवारों का साल भी गुजारा हो जाता है।