बागेश्वर जिले में आचार संहिता के चलते मकर संक्रांति के दिन सरयू बगड़ में राजनीतिक पंडाल नहीं लगाने के निर्णय का विभिन्न संगठनों ने विरोध किया है। संगठनों ने सरयू बगड़ पर प्रतीकात्मक रूप से कुली बेगार आंदोलन को याद किया और शासन-प्रशासन पर चली आ रही परंपरा को तोड़ने की निंदा की। सवाल संगठन के अध्यक्ष रमेश पांडेय कृषक, जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष गोविंद सिंह भंडारी और प्राधिकरण बचाओ मोर्चा के जिलाध्यक्ष प्रमोद डब्बू मेहता सरयू बगड़ पर एकजुट हुए। बगड़ में एकत्र होकर तीनों ने हमें जवाब चाहिए, इंकलाब चाहिए गीत गाकर विरोध दर्ज कराया। सवाल संगठन के अध्यक्ष कृषक ने कहा कि सरयू बगड़ पर हुए स्वतंत्रता संग्राम के हस्ताक्षर को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। सरयू बगड़ में हर साल राजनीतिक मंचों को रोकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को रोका गया है। आचार संहिता के नाम पर पंडालों को नहीं लगाने का निर्णय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान है। पूर्व बार संघ अध्यक्ष भंडारी ने कहा कि अंग्रेजों के शासन काल से पूर्व भी सरयू बगड़ में सभाएं होती रही हैं। 1921 में हुए कुली बेगार आंदोलन के प्रतीक इस परंपरा को नगरपालिका की आचार संहिता के नाम पर तोड़ने का निर्णय निंदनीय है। शासन-प्रशासन को याद दिलाना चाहते हैं कि जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।