शृंगेरी पीठ के शंकराचार्य विधुशेखर भारती के सानिध्य में शुरू हुए मां अन्नपूर्णा मंदिर के कुंभाभिषेक के दूसरे दिन रविवार को भी कोटि कुमकुमार्चन व ललिता सहस्रनाम जप हुआ। 75 वैदिक ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ छह घंटे पूजन किया। मंदिर के महंत शंकरपुरी ने गुरु पूजा की। फिर वैदिक ब्राह्मणों ने मां का कुमकुमार्चन किया। इस दौरान ललिता सहस्रनाम का जप किया। 10 दिनों तक 10 हजार बार जप होगा। ललिता सहस्रनाम में आदि देवी मां के एक हजार दिव्य नाम और 10,000 पाठ एक करोड़ के बराबर होते हैं। उन्होंने सुवासिनी पूजा, कुमारी पूजा, ललिताहोमा और संतर्पणम पूजन किया। शंकरपुरी महाराज ने बताया कि कुमकुम पवित्रता व निर्मलता का प्रतीक है। कुमकुम लगाने पर नकारात्मक ऊर्जा असर नहीं करती है। इसलिए आज्ञा चक्र पर कुमकुम धारण किया जाता है। यह मंगल ग्रह का भी प्रतीक माना जाता है, जो अत्यंत मंगलदायी और उर्जा से भरपूर होता है। महालक्ष्मी को भी कुमकुम अर्पित करते हैं जिससे धन, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।