नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की गई। चौक स्थित माता चंद्रघंटा के दर्शन को भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। मां चंद्रघंटा के शिख पर चंद्र और हस्त में घंटा है। चंद्रमा शांति एवं घंटा नाद का प्रतीक है। देवासुर संग्राम में देवी के घंटा नाद से अनेकानेक असुर काल के ग्रास बन गए। शास्त्रों में आराधना में नाद पर विशेष ध्यान दिया गया है। सुर एवं संगीत दोनों को ही वशीकरण का वीज मंत्र माना गया है। चंद्रघंटा देवी इसी की आराध्य शक्ति हैं। मां चंद्रघंटा नाद के साथ शांति का संदेश देती हैं। मां के इस स्वरूप की आराधना में सिद्धकुंजिका स्त्रोतम् का पाठ मंगल फलदायी है।