साल में शारदीय नवरात्र का महत्व विशेष होता है और वाराणसी के विद्वान इस महत्व को बता रहे हैं बीएचयू के सीनियर प्रोफेसर विनय पाण्डेय की माने तो इस बार देवी का आगमन और गमन शुभ नहीं है लिहाजा समाज में बीमारियों की संभावनाएं बनेंगी। इसके साथ ही राजनीतिक स्थिति भी उथल पुथल से गुजर सकती है। गौरतलब है कि नवरात्रि की पूजा अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होती है और दशमी में प्रवेश करते हैं इस बार ये तिथि 3 अक्टूबर से शुरू होकर 12 अक्टूबर तक पूरी हो रही है। बताया जा रहा है कि नौ दिन का अक्षुण्य काल बना हुआ है, इस बार देवी का आगमन पालक पर हो रहा है और कुकुट पर गमन हो रहा है जो जिस काल में नवरात्र मे देवी का आगमन हो रहा है वो शुभ नहीं हो रहा रोगों की अधिकता बढ़ती है। इन बाधाओं से मुक्ति के लिए देवी की नौ दिनों तक विशेष आराधना फलदायी होगी। जानकारों की माने तो प्रथम दिन कलश स्थापना करने के साथ ही दुर्गा चालीसा का पाठ करें। देवी के नाम पर उपवास रखें और दसवें दिन व्रत का पारण करें।इस क्रिया को करने से देवी प्रसन्न होंगी औ सारी बाधाओं को दूर करेंगी।