न्मस्थान मथुरा से सांस्कृतिक आदान प्रदान के नवाचार एवं सोनभद्र से वनवासी समाज द्वारा पलाश गुलाल के शिवार्पण से यह पर्व और भी दिव्य स्वरूप प्राप्त कर रहा है। इसी श्रृंखला में मंदिर के पारंपरिक पर्व को लोकमानस के और निकट लाने के सद्विचार के साथ इस वर्ष बाबा विश्वनाथ एवं मां गौरा की चल प्रतिमा शास्त्रीय अर्चना के साथ मंदिर चौक में शिवार्चनम मंच के निकट तीन दिन के लिए आज शाम से विराजमान की गई। विराजमान चल विग्रह के साथ सायंवेला में कार्यक्रम के समय हजारों की संख्या में श्री काशी विश्वनाथ धाम पधारने वाले श्रद्धालुओं द्वारा फूलों की होली संपन्न की गई। निरंतर तीन दिनों तक सांस्कृतिक उत्सव के साथ लोक उत्सव का आयोजन भी संपन्न किया जाएगा। जानिए क्या है खास कार्यक्रम .. 8 मार्च सायंकाल - फूलों से होली 9 मार्च प्रातः काल– हल्दी लगाने की प्रथा का निर्वहन 9 मार्च अपराह्न – अबीर होली 9 मार्च सायंकाल – गुलाल होली 10 मार्च प्रातःकाल – भस्म अर्पण 10 मार्च अपराह्न – हल्दी / भस्म अर्पण 10 मार्च सायंकाल – कृष्ण जन्मस्थान मथुरा से प्राप्त होली सामग्री, वनवासी समाज से प्राप्त पलाश गुलाल एवं काशी भस्म, बाबा विश्वनाथ एवं मां गौरा को अर्पण कर रंगभरी एकादशी पर्वोल्लास का आयोजन। दिनांक 10 मार्च को सायं 4 बजे मंदिर चौक से चल विग्रह की पालकी शोभायात्रा समारोहपूर्वक निकाली जाएगी। जिसमें काशी वासी एवं धाम पधारे श्रद्धालु प्रतिभाग करेंगे।