बेहद हसीन वो शाम हो जाए जब हर हिंदू में हो खुदा और मुस्लिम में राम नाम हो जाए...। 500 साल पुरानी लाटभैरव की रामलीला में कुछ ऐसा ही नजारा जीवंत हो उठा। एक तरफ अजान में अल्लाह हू अकबर... तो दूसरी ओर ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक पर मंगल भवन अमंगल हारी... गूंज रहा था।