बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वाराणसी में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि हम भगवान विश्वनाथ का दर्शन करने आए थे। रात में हमने माता कुष्मांडा और मणिकर्णिका का घाट का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि हमारे दादा गुरुश्री ने यहीं पर देह त्याग किया था। इस दौरान उन्होंने तिरुपति प्रकरण को देख का सबसे बड़ा दुर्भाग्य बताया। तिरुपति में मिलावटी लड्डू के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यह देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। मठों और मंदिरों में जितने भी आचार्य हैं उनको अगर अपने मंदिरों के प्रसाद की शुद्धता का ध्यान रखना है तो हर मंदिर में एक अपनी गौशाला होनी चाहिए। हम भारत के हिंदुओं को जगाने के लिए गांव-गांव जाकर पिछड़े से पिछड़े लोगों को गले लगाएंगे। इस दौरान उन्होंने स्कूली बच्चों से भी की मुलाकात की।