शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। मान्यता है कि मां के मस्तक पर चंद्र की आकृति होने के कारण उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा। मंदिर के प्रधान पुजारी वैभव योगेश्वर ने बताया कि तड़के 3 बजे मां के विग्रह का पंचामृत से स्नान कर उन्हें पीले वस्त्र और पीले फूलों से सजाया गया। इसके बाद भोर 4 बजे से भक्तों के लिए कपाट खोल दिए गए। शाम 5 बजे विशेष भोग आरती की गई, जबकि देर रात 12 बजे तक निरंतर दर्शन का क्रम चलता रहा। रात्रि 1 बजे शयन आरती के साथ मंदिर का पट बंद किया गया। माता चंद्रघंटा को दूध से बने मिष्ठान और पीले फलों का भोग अर्पित किया गया। चौक थाना के सामने चंद्रघंटा गली स्थित मंदिर के आसपास माला-फूल की दुकानों की सजी कतारें भक्तिमय माहौल का आभास करा रही थीं। संकरी गलियों में भक्तों की लंबी कतारें दर्शन के लिए उमड़ती रहीं।