बीएचयू में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में शामिल होने ओडिशा से आए ज्योतिष विद्वान राधेश्याम शर्मा ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस के बालकांड के दोहा संख्या 18 में कहा है कि बंदऊं नाम राम रघुबर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को। बिधि हरि हरमय वेद प्रान सो, अगुन अनुपम गुन निधान सो...मैं रघुनाथ के नाम राम की वंदना करता हूं जो अग्नि, सूर्य और चंद्रमा का हेतु अर्थात र, आ और म रूप से बीज हैं। वह राम नाम ब्रह्मा, विष्णु और शिवरूप हैं। वह वेदों का प्राण हैं, निर्गुण, उपमा रहित और गुणों का भंडार है।