बाबा विश्वनाथ की काशी नगरी के भगवान जगन्नाथ की पुरी बनने के अवसर पर गुरुवार को सूर्योदय की पहली किरण के साथ नाथों के नाथ जगन्नाथ जी की आरती उतारकर नमामि गंगे और अन्नपूर्णा सामाजिक सेवा समिति ने लोक कल्याण व पर्यावरण संरक्षण की कामना की । नीलांचल निवासाय नित्याय परमात्मने, बलभद्र सुभद्राभ्याम् जगन्नाथाय ते नमः... का मंत्र शिव की नगरी काशी में गुंंजायमान हो उठा। अष्टकोणीय पीत वर्ण के रथ पर आरूढ़ पीत वर्ण की वेशभूषा व पुष्पों से सुशोभित भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा व भैया बलदाऊ को प्रिय नान खटाई का प्रसाद चढ़ाकर विकसित, आत्मनिर्भर, गंगा निर्मलीकरण व आरोग्य भारत के लिए आशीर्वाद मांगा । पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को साधकर रथ यात्रा मेले में उपस्थित श्रद्धालुओं में भगवान जगन्नाथ के प्रिय तुलसी पौधे एवं कपड़े के झोले का वितरण किया गया। रथयात्रा मेले में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं एवं पूजन सामग्री के दुकानदारों से पर्यावरण संरक्षण के लिए सिंगल यूज पॉलीथिन का उपयोग न करने की अपील की गई। सदस्यों ने रथ के आस-पास सफाई कर स्वच्छता को संस्कार के रूप में शामिल करने का संदेश दिया। नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक व नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि रथ यात्रा का मूल संबंध भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथयात्रा के साथ कृषि की तैयारी, वर्षा का स्वागत, वृक्षारोपण और भारतीय लोक संस्कृति की परंपराओं को जोड़ने से भी है। इन्हीं परंपराओं में पर्यावरण विज्ञान भी छिपा हुआ है। आयोजन में प्रमुख रूप से अन्नपूर्णा सामाजिक सेवा समिति की अध्यक्ष नीलिमा राय, रीता पटेल, गीता सचदेवा, गीता मिश्रा, सुशीला पांडेय, उषा सिंह, संध्या श्रीवास्तव, सुनैना शाहा, उषा वर्मा उपस्थित रहे ।