नौवीं मोहर्रम पर शनिवार की शाम असर की नमाज के बाद शहर से लेकर गांव तक के इमाम चौकों पर ताजिये बैठाई गई तो 'या हुसैन या हुसैन' की सदाएं गूंज उठे। इमाम चौकों पर शहीदाने कर्बला की याद में फातिहा पढ़ी गई और इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को शिद्दत से याद की गई।