आस्ताने आलिया सरकार बहादुर शहीद, सदर बाजार (कैंट) के इजहार अहमद हबीबी का कहना है कि बनारस का मोहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सदियों पुरानी गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी सौहार्द और इंसानियत का जीवंत प्रतीक है। यहां मोहर्रम के दिनों में विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग मिलकर इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं और उनके बताए सत्य, न्याय और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाते हैं।