श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े के नागा संन्यासी खुशहाल भारती ने कहा कि सोशल मीडिया के बहकावे में आकर काशीवासियों को कोई निर्णय नहीं करना चाहिए। मसान की होली उनके लिए नहीं है। इसे साधु-संतों और अघोरियों के लिए ही छोड़ दें। काशीवासी बाबा विश्वनाथ से अपने संबंधों का निर्वाह करते हुए उनके विवाह का उत्सव मनाएं। तिलक, तेल, हल्दी, विवाह के बाद गौने की परंपरा का निर्वहन करें। पूर्व महंत के परिवार की अगुवाई में कई सौ वर्षों से काशी के गृहस्थ इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं। यही काशी का गौरव और विशिष्टता है। यह परंपरा बनी रहे इसका दायित्व काशीवासियों का है।