पुरोहित सभा के मनीष नंदन मिश्रा ने कहा कि काशी सभी युगों में थी और आगे भी रहेगी। काशी में सभी देव मूल रूप में हैं। पहले तो यह समझ लें कि मणिकर्णिका शास्त्रों में श्मशान नहीं है। यह जलासेन घाट है। मणिकर्णिका परम पुण्यतीर्थम, तीर्थों का सुप्रीम कोर्ट है। 1762 में यहां पहली चिता जली। यहां कुछ औघड़ और कर्मचारी पूजन करते थे। यह कपड़ा फाड़ना, नशा करना और गांजा पीकर पड़े रहना इसे ऐसा मनोरंजन केंद्र बन गया है। क्रिएटिव के चक्कर में धर्म खत्म कर देंगे। होली वाले दिन ही होली होती है और ढुंढा देवी का पूजन होता है।