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VIDEO : अलम, ताबूत और दुलदुल की जियारत करने उमड़ा जनसैलाब, आंसुओं और खूनी मातम का भी पेश किया नजराना

अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 17 Jul 2024 10:33 PM IST

नामे हुसैन गूंजा है शंकर के शहर में, गूंजी है कर्बला में सदा मैं हुसैन हूं... की सदाओं से काशी की गलियां और चौराहे गूंजते रहे। यौमे आशूरा पर जब ताजियों का जुलूस निकला तो हर आंख अश्कबार थी और हर होंठ पर या हुसैन अलविदा... के बोल थे। अजादारों ने जंजीर और कमा के मातम के जरिये करबला के 72 शहीदों को खून के साथ ही आंसूओं का नजराना पेश किया। देर रात सबसे आखिर में रांगे का ताजिया दरगाह ए फातमान पहुंचा।

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