वाराणसी के अस्सी घाट पर बुढ़वा मंगल का आयोजन किया गया। होली के बाद सभी लोग इकट्ठा हुए और काव्य गीतों के साथ गुलाब की पंखुड़ियां उड़ाकर परंपरा निभाई गई। बता दें कि काशी में होली का खुमार एक सप्ताह तक होता है और बुढ़वा मंगल तक होली खेले जाने की परंपरा होती है। सुबह ए बनारस के मंच पर गीतों की फुहार के साथ परंपरा निभाई गई।