भोजपुरी सम्राट भरत शर्मा व्यास ने देवी गीतों से मां काली के चरणों को पखारा। उन्होंने जीभ लटकल होई मुंड के माला, देखिह भवानी माई रूप होई काला... से शुरुआत की तो श्रोता भी उनके सुर से सुर मिलाने लगे। इसके बाद जवने गांव काली माई के मंदिर नाही बा उ गांव बेकार बा... के बाद निमिया के डार मैया डालेली झूलनवा... की शुरुआत की तो पूरा प्रांगण झंकृत हो उठा।