मैं भगवान को साक्षी मानकर शपथ लेता हूं कि भारतीय संविधान में स्थापित कानून द्वारा देश भक्ति के प्रति विश्वास रखूंगा। मैं भारतीय संघ की भारतीय सेना में अपने कर्तव्य को ईमानदारी और विश्वास से निभाऊंगा। जब भी मुझे जमीन, समुद्र और हवा के रास्ते भेजा जाएगा तो जाउंगा। भारतीय संघ के अधिनायक और जो अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे उनकी आज्ञा का पालन करुंगा। चाहे इसमें मुझे अपना जीवन भी बलिदान करना पड़े... ये बातें 31 सप्ताह की कड़ी तपस्या के बाद देश के अलग-अलग प्रांतों के बैच संख्या एबी 005/24 के अंतर्गत 197 अग्निवीरों ने मंगलवार को 39 जीटीसी में पासिंग आउट परेड में शपथ समारोह के दौरान दोहराईं। माताओं ने देश को 197 अग्निवीर समर्पित किए। छावनी क्षेत्र के 39 गोरखा ट्रेनिंग सेंटर (जीटीसी) में सुबह ही देशभक्ति की बयार बहने लगी, जब अग्निवीर जवानों की कदमताल ने पूरे वातावरण को राष्ट्रप्रेम से सराबोर कर दिया। भारतीय सेना की एक भव्य और गौरवशाली पासिंग आउट परेड हुई। समारोह में युवा कैडेट्स ने भारतीय सेना में शामिल होने की शपथ ली। खुकरी प्रस्तुति से हुई, इसके बाद अनुशासित मार्च पास्ट हुआ। कदमताल कर 197 अग्निवीरों ने कठोर प्रशिक्षण और अनुशासन का परिचय दिया। परेड की समीक्षा ब्रिगेडियर अनिर्बान दत्ता, एसएम, कमांडेंट 39 गोरखा ट्रेनिंग सेंटर ने की। उन्होंने युवा अधिकारियों को राष्ट्र के प्रति उनके कर्तव्यों की याद दिलाई और शुभकामनाएं दीं। ब्रिगेडियर अनिर्बान दत्ता ने कहा कि भारतीय सेना न केवल शारीरिक बल, बल्कि मानसिक और नैतिक दृढ़ता की मिसाल है। समारोह का संचालन सूबेदार यशविंदर सिंह ने किया। परेड को वीर जवानों के माता-पिता, पूर्व सैनिकों और जिले के प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने देखा। प्रशिक्षुओं ने सटीकता और कौशल से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जवानों ने सलामी मंच के सामने शस्त्र प्रस्तुत किए, जोरदार तालियों से दर्शकों ने उनका उत्साहवर्धन किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अग्निवीरों को दिए गए पदक युद्ध शारीरिक दक्षता परीक्षण में सर्वश्रेष्ठ - एवी करण भट्टराई, ड्रिल में सर्वश्रेष्ठ - एवी अरुण तमांग, दूसरा ऑल राउंड बेस्ट-एवी सूरज गुरुंग, रणनीति, फायरिंग और समग्र रूप से सर्वश्रेष्ठ - एवी विदांश बिष्ट। देसी और विदेशी भाषाओं में परेड का संचालन कार्यक्रम का संचालन देसी और विदेशी भाषा में किया गया। हिंदी और नेपाली में वीरों के गीत, अमृत वचन, शौर्य कहानियां बताई गईं। साथ ही अग्निवीरों और उनके परिवार वालों को सेना के नियमों के बारे में बताया गया। परिजनों को सम्मानित किया गया। ब्रिगेडियर अनिर्बान दत्ता ने अग्निवीरों और उनके परिजनों से बात की। चार प्रांत के युवा बने अग्निवीर मणिपुर, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम के युवा अग्निवीर बने। इन्हें 31 सप्ताह तक कठिन ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग में सभी तरह के हथियार, पहाड़ और पानी में कैसे जिंदा रहना है, इसकी ट्रेनिंग दी गई। ये अग्निवीर देश के किसी भी कोन में जा सकते हैं। ड्रोन, मैपिंग, 3 डी एनिमेशन सहित कई तरह की जानकारी दी गई। चार साल बाद इनके कार्य के आधार पर प्रमोट किया जाएगा। भाई-बहनों ने खिलाई मिठाई अग्निवीर बनने के बाद परिजनों की खुशी देखने लायक रही। बेटों को सीने से लगाकर बधाई दी। सेंटर की तरफ से परिजनों को निमंत्रण भेजकर बुलाया गया था। किसी के भाई ने तो किसी की बहन ने मिठाई खिलाकर देश की सेवा के लिए समर्पित किया।