चैत्र नवरात्र की सप्तमी तिथि पर काशी में बुधवार को शक्ति की उपासना का नजारा देखने को मिला। काल का संहार करने वाली और भक्तों को अभय प्रदान करने वाली मां कालरात्रि के दर्शन के लिए कालिका गली स्थित प्राचीन मंदिर में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। भोर की पहली किरण के साथ ही पूरा परिसर जय माता दी... और नमस्तस्यै नमो नमः... के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। सप्तमी तिथि के विशेष अवसर पर माता का दिव्य और अलौकिक शृंगार किया गया। भोर में परंपरा के अनुसार मां के विग्रह को पंचामृत स्नान कराया गया। इसके बाद उन्हें लाल गुड़हल, गेंदे और ताजे गुलाब के फूलों से शृंगार किया गया। मंगला आरती के बाद जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, श्रद्धालुओं की लंबी कतारें सड़कों तक नजर आने लगीं। भक्तों ने माता को नारियल, लाल चुनरी और पुष्प अर्पित कर सुख-समृद्धि एवं सौभाग्य की कामना की। सुरक्षा और व्यवस्था के लिए प्रशासन ने भी कड़े इंतजाम किए थे। काशीवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भी मां की सुंदर छटा निहारी।