दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र में स्थित मेसर्स इम्पार्टियल एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड (खाद्य प्रसंस्करण यूनिट) में मुंबई व नरौरा से पहुंची परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद (एइआरबी) की टीमों ने छापा मारा। लाइसेंस का नवीनीकरण न कराए जाने से फैक्टरी करीब नौ से बंद चल रही थी, जबकि टीम को चोरी छिपे फैक्टरी संचालित होने की सूचना मिली थी। फैक्टरी में खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए गामा विकरण के खतरे को देखते हुए एइआरबी की टीम ने रिसाव वाले प्वाइंटों व मेन गेट को सील कर दिया। यूनिट के संचालक कानपुर निवासी उद्यमी को यहां संरक्षित कोबाल्ट-60 को मुंबई स्थित अनुसंधान केंद्र में शिफ्ट कराने के लिए दो महीने की मोहलत दी है। केंद्र सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग अणुशक्ति भवन मुंबई के निदेशक के निर्देश पर बुधवार दोपहर उन्नाव के दही चौकी साइट-1 औद्योगिक क्षेत्र पहुंची सात सदस्यीय टीम ने फैक्टरी में छापा मारा। टीम ने गेट पर सीलिंग का नोटिस चस्पा करने के साथ ही प्रसंस्करण चेंबर से विकरण के खतरे को देखते हुए सील कर दिया गया। इस प्रसंस्करण यूनिट में फलों, मांस और पेट फूड्स जैसे खाद्य पदार्थों गामा विकरण (रेडिएशन) के बैक्टीरिया मुक्त किया जाता था। इससे दो खाद्य पदार्थ फ्रीज होने के बाद सात महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता था। वह रेडिएशन प्रक्रिया के बाद 10 से 15 महीने सुरिक्षत रह सकता है। मुंबई टीम के साथ ही नरौरा अनुसंधान परमाणु केंद्र के निदेशक एसके कावरे की अगुवाई में पहुंची टीम में परमाणु ऊर्जा विभाग के निदेशक (सिक्योरिटी एंड कोआर्डिनेशन) मुंबई से किरन सोनवानी, आरबी राकेश, आरकेबी यादव, डीएम रामे, दीपक शर्मा और अभिन्यु सरकार शामिल रहे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार इस इकाई को कानपुर निवासी योगेश तिवारी ने दो अन्य पार्टनर के साथ मिलकर स्थापित किया था। इसके लिए कोबाल्ट-60 को परमाणु अनुसंधान केंद्र से लिया गया था लेकिन 2017 में इकाई संचालक बंद कर दिया और लाइसेंस का नवीनीकरण भी नहीं कराया।