गुरुवार को मोस्ट कल्याण के बैनर तले कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया गया। डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को सम्बोधित एक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा गया है। बता दें कि अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग ने 16 जून, 2025 को सभी जिलाधिकारियों को प्राथमिक विद्यालयों का समीप के विद्यालयों से विलय करने का आदेश जारी किया है। मोस्ट ने इस कदम को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21ए का उल्लंघन माना है। इस अनुच्छेद के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार प्राप्त है। जिला स्तर पर बीएसए और एबीएसए स्कूल स्टाफ से जबरन सहमति ले रहे हैं। मोस्ट का कहना है कि इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी। गांव, गरीब और पिछड़े समाज के बच्चों को शिक्षा से वंचित होने का खतरा है। इससे क्षेत्र की साक्षरता दर में गिरावट आ सकती है। संविधान के अनुच्छेद 41 के अनुसार शिक्षा प्रदान करना राज्य की जिम्मेदारी है। साथ ही माता-पिता का यह मौलिक कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करें। विद्यालयों की संख्या कम करने के बजाय नामांकन बढ़ाने और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की जा रही है।