सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट खराब होने से दो युवकों के फंसने के मामले की जांच रेलवे ने शुरू कर दी है। शनिवार को लखनऊ से विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मनोज सरोहा स्टेशन पहुंचे। घटना से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए। दरअसल, 10 जुलाई की रात आर्मी हेडक्वार्टर, दिल्ली में तैनात नायब सूबेदार प्रदीप त्रिपाठी के बेटे आदर्श त्रिपाठी और कुशाग्र स्टेशन की लिफ्ट में फंस गए थे। आदर्श अपनी मां और बहनों को प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर छोड़कर कुशाग्र के साथ ट्रेन की जानकारी लेने प्लेटफॉर्म नंबर-1 की ओर जा रहा था। इसी समय लिफ्ट बीच में रुक गई। दोनों युवकों ने गेट खोलने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। रेलवे अधिकारियों को कई बार फोन किया, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। लिफ्ट में ऑक्सीजन की कमी के कारण दोनों की हालत बिगड़ने लगी। ऐसे में आदर्श ने अपने पिता को फोन करके जानकारी दी। नायब सूबेदार त्रिपाठी ने तुरंत पूर्व सांसद मेनका गांधी के ओएसडी से संपर्क किया। मेनका गांधी ने रात 11 बजे भाजपा नेता शशिकांत पांडेय से मदद मांगी। शशिकांत पांडेय ने रेलवे अधिकारियों को सूचना दी। खुद स्टेशन पहुंचकर कार्रवाई शुरू करवाई। रात करीब 11:30 बजे लिफ्ट का लॉक तोड़कर दोनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। नायब सूबेदार त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि घटना के समय स्टेशन मास्टर ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे। आरपीएफ जवानों ने न केवल मदद करने से इन्कार कर दिया, बल्कि बाद में युवकों के साथ अभद्रता भी की। घटना से उन लोगों की ट्रेन छूट गई। इससे उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। रेलवे ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारी घटनास्थल की तकनीकी जांच के साथ-साथ कर्मचारियों की भूमिका की भी समीक्षा कर रहे हैं।