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सूखे नशे से बर्बाद हो रहे युवाओं को मिलेगी नई जिंदगी, मेडिकल कॉलेज में शुरू हुआ ओएसटी सेंटर

सोनभद्र में सूखे नशे (अफीम, हेरोइन, स्मैक) से बर्बाद हो रही युवाओं को नई जिंदगी देने के लिए मेडिकल कॉलेज में ओएसटी (ओपिओइड सब्सीट्यूशन थिरेपी) सेंटर का शुभारंभ किया गया। यहां अफीम, हेरोइन, स्मैक के लती व्यक्तियों को उपचार-काउंसिलंग की जाएगी। मरीजों को खोजकर सेंटर तक पहुंचाने में एनजीओ की टीमें सहयोग करेंगी। लगभग 300 मरीज चिन्हित भी कर लिए गए हैं। सामान्य रूप से भी तीन से चार नशे के लती रोजाना मेडिकल कॉलेज के मनोरोग चिकित्सा विभाग में पहुंच रहे हैं। प्राचार्य प्रो. आनंद कुमार ने फीता काटकर थिरेपी सेंटर का शुभारंभ किया। कहा कि यह पद्धति अफीम, हेरोइन या स्मैक जैसे नशे से पीड़ित व्यक्तियों के लिए एक सुरक्षित और वैज्ञानिक चिकित्सा है। इसमें खतरनाक और अवैध नशे की जगह डॉक्टर की देखरेख में सुरक्षित दवाएं (मेथाडोन या बुप्रेनोर्फिन) दी जाती हैं। यह दवाइयां नशे की तलब और होने वाली शारीरिक परेशानी को दूर करती हैं। हेरोइन के नशे के लिए लिए बार-बार इंजेक्शन लगाने से बनने वाली इंफेक्शन की भी स्थिति से यह थिरेपी बचाव करेगी। असिस्टेंट प्रोफेसर मनोरोग चिकित्सा डॉ. जितेश गुप्ता ने कहा कि इस कार्य में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (एनएसीओ) और उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी (यूपीएसएसीएस) की टीम सहयोगी करेगी। नशे से जूझ रहे व्यक्तियों व उनके परिवारीजनों से अपील की कि वह बगैर झिझक के इस सुविधा का लाभ उठाएं। कहा कि नशा कोई अपराध नहीं, बल्कि एक उपचार योग्य बीमारी है। सेवानिवृत्त एसीएमओ डॉ. गणेश, डॉ. बीके श्रीवास्तव, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉॅ. राहुल सिंह, डॉ. अश्वनी शाह, डॉ. अमित गुप्ता, डॉ.अमित पाठक आदि ने भी विचार रखे।कहा कि एचआईवी से बचाव में यह थिरेपी काफी कारगर है।

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