केंद्र व राज्य सरकार की कथित मजदूर, किसान एवं जन-विरोधी नीतियों के विरोध में आहूत अखिल भारतीय हड़ताल के समर्थन में गुरुवार को विभिन्न ट्रेड यूनियनों व संगठनों के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शन में इंटक के जिलाध्यक्ष हरदेव नारायण तिवारी ने कहा कि सरकार द्वारा लागू चारों श्रम संहिताएं श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करती हैं, जिन्हें तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्युत संशोधन विधेयक 2025 व अन्य जन-विरोधी संशोधनों को वापस लेने की भी मांग उठाई। जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष व इंटक के उपाध्यक्ष बृजेश तिवारी ने कहा कि मनरेगा को कमजोर करने, ग्रामीण रोजगार की गारंटी समाप्त करने, न्यूनतम वेतन लागू न करने तथा ठेका, संविदा व आउटसोर्स व्यवस्था को बढ़ावा देने से मजदूरों व किसानों का जीवन संकट में है। लालचंद, शमीम अख्तर खान व राजेंद्र प्रसाद ने हड़ताल की प्रमुख मांगों में चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने, विद्युत संशोधन विधेयक व बीज बिल 2025 वापस लेने, मनरेगा को मजबूत करने, न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह तय करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, स्कीम वर्कर्स को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, ठेका व संविदा कर्मियों को नियमित करने तथा ई-श्रम पंजीकृत श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग शामिल बताई। नेताओं ने मजदूरों, किसानों, कर्मचारियों व आमजन से आंदोलन को समर्थन देने की अपील की। प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशुतोष दुबे, आकाश वर्मा, जयशंकर भारद्वाज, एचके उपाध्याय, राजेश देव पांडेय, हरिशंकर गौड़, राजाराम भारती, मुकेश चेरो, प्रहलाद गुप्ता, जवाहर यादव, दूधनाथ खरवार, शिवप्रसाद खरवार, सुरेंद्र गौड़, जिब्रील खान, रामचंद्र मौर्य, स्वतंत्र श्रीवास्तव, कौशल्या देवी, मीना देवी, कुंती देवी, शांति देवी सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।