मातृभाषा हिंदी को जाने बिना अपने हृदय की पीड़ा नहीं मिटा सकते। वैसे भी अपने गांव समाज में अपने मनोभावों की अभिव्यक्ति हम अपनी मातृभाषा में ही करते हैं। तो अपने मातृभाषा का ज्ञान सम्मान के साथ हम लोगों को अर्जित करनी चाहिए। राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बसौनी में उक्त बातें हिंदी दिवस के पूर्व संध्या पर मातृभाषा हिंदी के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रेश शास्त्री ने कहीं।