यूपी के श्रावस्ती में मुहर्रम में ताजिया रखने की एक अलग ही परंपरा है। यहां कई गांवों में हिंदू परिवार भी घरों में ताजिया रखते हैं। वह मुस्लिम परिवारों के साथ मिलकर अपने ताजिया को जुलूस के साथ कर्बला ले जाते हैं। वहां परंपरागत ढंग से ताजिए को सुपुर्द ए खाक करते हैं। गिलौला के केरवनिया गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है। इसके बावजूद गांव से ताजिया का जुलूस निकलता है। यहां कई हिंदू परिवार ताजिया रखते हैं। क्षेत्र के ही तिलकपुर गांव में भी हिंदू परिवार पूरी शिद्दत के साथ मुहर्रम का त्योहार मनाते हैं। घरों में चौक बनाकर ताजिया रखने के साथ ही मासिया भी पढ़ा जाता है। परिवार की महिलाएं मासिया गाती हैं। बाद में जुलूस के साथ ताजिया ले जाकर कर्बला में दफन करते हैं। तिलकपुर गांव निवासी अनुसूचित जाति के जयराम बताते हैं कि वह हिंदू हैं। वह ताजिया रखते हैं। परिवार की ही संवारा ने बताया कि उनको कोई औलाद नहीं थी। मन्नत के बाद उन्हें बच्चा हुआ। तब से वह ताजिया रखती आ रही हैं। गांव के ही बबलू का कहना है कि वह पहले कमर लगाते थे (पायक बनते थे)। वह भी मनौती पूरी होने के बाद से ताजिया रखते आ रहे हैं। ऐसा ही गांव के अन्य लोगों का भी कहना है। जो पहले पायक बनते थे, अब ताजिया रखते हैं।