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Video: श्रावस्ती में छठवें दिन भी खेत में परिक्रमा कर रही गाय, ग्रामीण मान रहे दैवीय शक्ति

ग्राम पंचायत बसभरिया में गाय की परिक्रमा लगाने का सिलसिला लगातार छठवें दिन जारी है। गांव निवासी सिपाही लाल केवट के खेत में परिक्रमा कर रही गाय अब ग्रामीणों के आस्था का भी प्रतीक बन गई है और मंडल के सभी जिलों से लोग गाय के दर्शन व पूजन के लिए आ रहे हैं। वहीं, पशु चिकित्सक इसे मानसिक बीमारी बता रहे हैं। खेत में परिक्रमा कर रही गाय को लेकर ग्रामीणों ने बताया कि गाय को पहली बार शुक्रवार को झारखंडी मंदिर में देखा गया था। मंदिर से लौटने के कुछ देर बाद ही गाय ने सिपाही लाल केवट के खेत में परिक्रमा शुरू कर दी। पहले दिन तो लोगों ने इसे सामान्य माना लेकिन दूसरे दिन से लोग इसे आस्था से जोड़ने लगे। वहीं, अब गाय के लगातार छठवें दिन खेत में परिक्रमा करने को लेकर लोग पूरी तरह से इसे दैवीय शक्ति मानने लगे हैं। आलम ये है कि गाय का दर्शन करने के लिए बहराइच, बलरामपुर, गोंडा सहित श्रावस्ती जिले के अलग-अलग स्थानों से लोग अपने वाहनों से पहुंच रहे हैं। लोग घंटों पेड़ की छांव में बैठकर कर गाय की परिक्रमा देखते हैं और फिर पैर पकड़कर आशीर्वाद लेते हैं। शाम को खाती है हल्का चारा और पीती है पानी ग्रामीणों ने बताया कि गाय किसी के भी द्वारा रोटी, गुड़ आदि खिलाने पर नहीं खाती है। वहीं, ग्रामीणों ने बताया कि अगर परिक्रमा के दौरान कोई गाय का पैर पकड़ता या कुछ खिलाने का प्रयास करता है तो वापस लौटकर फिर से परिक्रमा शुरू करती है। जिसके चलते लोगों की आस्था और मजबूत हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि गाय शाम के समय थोड़ा हरा चारा खाती है और पानी पीती है। वहीं, रात में बस कुछ घंटों के लिए ही बैठती है। पूरा दिन वो नहीं बैठती है। गाय को है मानसिक बीमारी: पशु चिकित्सक गाय के परिक्रमा करने की जानकारी पर रविवार को पयागपुर के पशु चिकित्सक ने गाय का इलाज किया था। इलाज के कुछ घंटे बाद फिर से गाय ने परिक्रमा शुरू कर दी थी। राजकीय पशु चिकित्सालय भिनगा के पशु चिकित्साधिकारी विनय सिंह ने बताया कि गाय को मानसिक बीमारी है। गाय को तत्काल इलाज की आवश्यकता है लेकिन ग्रामीण इलाज नहीं करने दे रहे हैं। इलाज के बाद निकलने लगे थे आंसू ग्रामीणों ने बताया कि रविवार को गाय को बांधकर पयागपुर के चिकित्सक ने इंजेक्शन लगाया था और इलाज किया था। इलाज के दौरान लगातार गाय की आंख से आंसू निकल रहे थे। वहीं आंसू निकलने से गाय की आंख पर निशान भी बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गाय इलाज नहीं करवाना चाहती है। इसी के चलते चिकित्सक के जाने के बाद उसे खोल दिया गया। खोलते ही उसका रोना बंद हो गया, जो दैवीय चमत्कार ही है।

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