बुद्ध पूर्णिमा की संध्या पर बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती के जेतवन परिसर में दीप यज्ञ का आयोजन किया गया और 6000 दीप जलाए गए। वहीं, गंध कुटी में बौद्ध भिक्षु देवेंद्र के नेतृत्व में विशेष फूल पूजा की गई। इस दौरान बौद्ध भिक्षु देवेंद्र ने अहिंसक यज्ञों के महत्व पर भगवान बुद्ध के उपदेशों की सभी को जानकारी दी। बौद्ध भिक्षु देवेंद्र ने कौशल नरेश प्रसेनजित के यज्ञ का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रसेनजित ने सैकड़ों पशुओं को बलि देने की तैयारी की थी। भगवान बुद्ध ने ऐसे यज्ञों को अस्वीकार किया, जहां निरीह प्राणियों की हिंसा होती है। उन्होंने कहा कि विद्वानों को ऐसा यज्ञ करना चाहिए जिसमें हिंसा न हो। देवेंद्र ने दीर्घ निकाय के कूटदत्त सुत्त का हवाला देते हुए महाविजित राजा की कथा भी सुनाई, जिसमें राजा ने लोक कल्याण के विभिन्न कार्य किए थे। भिक्षु ने बताया कि बुद्ध ने कहा था कि कि लोगों का भला करने वाले सत्कर्म ही उत्तम यज्ञ हैं। कार्यक्रम में मौजूद विजय बौद्ध ने बताया कि पूरे परिसर में 6000 दीप जलाए गए हैं। दीप यज्ञ के दौरान जेतवन परिसर के प्रमुख स्थलों गंध कुटी, शिवली स्तूप, बोधि वृक्ष, सभा मंडप, कौशाम कुट्टी और सूर्यकुंड को पुष्पों और दीपों से सजाया गया। इस दौरान राजकिशोर वर्मा, संजय खन्ना, बौद्ध भिक्षु भंवरानंद, नाग लोक, मेघा थेरो आदि मौजूद रहीं।