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Shamli: कलयुग के 'श्रवण’ की अनोखी सेवा यात्रा, पालकी में माता-पिता को लेकर हरिद्वार से शामली पहुंचे दो भाई

हिसार जिले के बरवाला के दो सगे भाई सोनू और कालाराम ने माता-पिता के प्रति सेवा और सम्मान की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी का दिल छू लिया। दोनों भाई हरिद्वार से अपने माता-पिता को पालकी में बैठाकर पैदल शामली पहुंचे। जैसे ही यह अनोखी यात्रा शामली पहुंची, लोगों ने फूल-मालाओं से उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें ‘आधुनिक श्रवण’ का दर्जा दिया। कालाराम ने बताया कि वह खेतीबाड़ी करते हैं। करीब दो महीने पहले भाई सोनू के साथ उन्होंने निश्चय किया कि इस बार कांवड़ यात्रा की जगह अपने पिता चंदुराम और मां संतोष देवी को श्रवण कुमार की तरह पालकी में बैठाकर हरिद्वार ले जाएंगे, गंगा स्नान कराएंगे और फिर पैदल वापस लेकर आएंगे। शुरू में माता-पिता ने कठिन यात्रा का हवाला देकर मना कर दिया, लेकिन बेटों के प्रेम और जिद के आगे मान गए। 13 जुलाई को हरिद्वार से शुरू हुई यह सेवा यात्रा कई जिलों से होकर गुजरते हुए शनिवार को शामली पहुंची। रास्ते में जहां-जहां यह पालकी रुकी, लोगों ने दोनों भाइयों के जज्बे को सलाम किया। माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने कहा हम सचमुच भाग्यशाली हैं कि हमें श्रवण जैसे बेटे मिले, जिनकी सेवा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। सोनू ने बताया कि इस यात्रा में उनके चचेरे भाई अंकित सहित अन्य परिजनों ने भी भरपूर सहयोग दिया।

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