झिंझाना के एक निजी अस्पताल में सोमवार को उस समय हंगामा हो गया जब परिजनों ने बच्चे को बदलने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि प्रसव के समय नर्स और स्टाफ ने उन्हें लड़का होने की जानकारी दी थी, लेकिन 14 दिन एनआईसीयू में उपचार के बाद डिस्चार्ज के समय बच्ची सौंप दी गई। अस्पताल समिति के अतुल बंसल ने स्पष्ट किया कि प्रसव के समय ही परिजनों को बच्ची होने की जानकारी दी गई थी और रिकॉर्ड भी यही दर्शाते हैं। वहीं, परिजन डीएनए जांच कराने पर अड़े हैं, जिस पर अस्पताल संचालक भी सहमत हो गए हैं। हालांकि अब तक परिजनों ने पुलिस को कोई तहरीर नहीं दी है।