देश की खातिर जान देने वाले शहीद शैलेंद्र सिंह की शहादत को अफसर भूल बैठे हैं। यही वजह है कि शहीद जवान के घर जाने वाली सड़क गड्ढों में तब्दील है। इससे आक्रोशित नागरिक सोमवार को बीच सड़क में ही धरने पर बैठ गए। पालिकाध्यक्ष और अफसरों के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए उन्हें जमकर कोसा। बोले, बारिश में पानी भरने से पता नहीं चल पाता कि सडक़ कहां है। मरम्मत कराने के नाम पर किसी को सुध नहीं है। एक घंटे तक विरोध प्रदर्शन के बाद नागरिक घर चले गए। पांच अक्तूबर 2020 को पुलवामा में हुए हमले में रायबरेली शहर के मलिकमऊ कॉलोनी निवासी सीआरपीएफ जवान शैलेंद्र सिंह शहीद हो गए थे। रायबरेली-सुल्तानपुर हाईवे से शहीद जवान के घर होते हुए सड़क निकली है। तीन साल से सड़क की मरम्मत नहीं कराई है। मरम्मत के अभाव में सड़क गड्डों में तब्दील है। गिटिट्यां बाहर निकल आई हैं। सोमवार को बारिश में सडक़ में पानी भरने से नागरिकों को आने-जाने में परेशानी झेलनी पड़ी। सभासद बृजेश पांडेय उर्फ रोहित पांडेय की अगुवाई में रमेश सिंह, सोनू त्रिवेदी, नागेश्वर, हरिशंकर, राजू शर्मा, बीनू द्विवेदी आदि लोग सुबह 10 बजे 11 बजे तक सडक़ पर ही धरने पर बैठकर प्रदर्शन किया। सभी का आरोप था कि शहीद के घर जाने वाली सड़क तक की मरम्मत कराने पर कंजूसी बरती जा रही है। मोहल्ले के लोग परेशान हैं। खासकर बारिश के समय में और दिक्कत होती है। वजह गड्ढे होने से आवागमन में दिक्कत होती है। पालिकाध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी भी की। पालिका के अधिकारियों को भी सडक़ मरम्मत न होने के लिए जिम्मेदार ठहराया। उधर, पालिकाध्यक्ष शत्रोहन सोनकर का कहना है कि बारिश की वजह से सडक़ें खराब हुई हैं। बारिश भी शहर की सभी सडक़ों का कायाकल्प करा दिया जाएगा। खस्ताहाल सड़कों ने शहरवासियों को किया परेशान खस्ताहाल सड़कों ने शहर की तस्वीर को बदल दिया है। जिस सडक़ से गुजरो, वहीं गड्ढों में तब्दील है। सोमवार को बारिश के चलते जिला अस्पताल से सुपर मार्केट, रामकृपाल चौराहा से कैपरगंज, मधुबन रोड, नया पुरवा, मटिहा रोड समेत अन्य सडक़ों में पानी भरा रहा। आने-जाने वाले नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। नागरिकों का कहना है कि दो साल की अवधि में ही सडक़ों की मरम्मत कराई गई हैं। मरम्मत का कार्य ठीक न होने से सडक़ें बदहाल हैं। सड़कों का निर्माण करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए