यूसुफपुर गांव के किसानों के सब्र का बांध मंगलवार को टूट गया। गंगा एक्सप्रेसवे के बगल नहर पटरी कटने से गेहूं की फसल जलमग्न होने पर आक्रोशित किसानों ने तहसील पहुंचकर प्रदर्शन किया। किसानों ने सामूहिक रूप से एसडीएम को प्रार्थना पत्र सौंपा। नष्ट हुई फसल का मुआवजा दिलाने की मांग की। किसानों का कहना है कि गंगा एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान नहर पर बनाए गए पुल और उसकी पटरी क्षतिग्रस्त हो गई। मरम्मत न होने के कारण नहर का पानी उफनाकर खेतों में भर गया। इससे करीब 200 बीघे क्षेत्र में खड़ी गेहूं की फसल प्रभावित हुई। ग्रामीणों के मुताबिक 80 बीघे फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। ग्रामीण नरेंद्र सिंह, ओम प्रकाश, रामखेलावन, कुशमा, सरजू देवी, भोलाशंकर, सुंदर, फुला देवी, बबली, मीना, रामचरन, पीर मोहम्मद, राजेंद्र और किरन सहित अन्य किसानों ने बताया कि खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ है। नहर पटरी की मरम्मत न होने से स्थिति लगातार बिगड़ रही है। हर दिन नुकसान बढ़ता जा रहा है। किसानों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो नहर विभाग ने ध्यान दिया और न ही गंगा एक्सप्रेसवे की निर्माण इकाई ने कोई ठोस कदम उठाया। खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था नहीं कराई गई। इससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों बर्बाद हो गई। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि गेहूं की फसल ही उनकी सालभर की उम्मीद होती है। बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर भारी खर्च हुआ है। फसल नष्ट होने से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने संयुक्तरुप से प्रार्थना पत्र देकर नष्ट हुई फसल का आकलन कराकर तत्काल मुआवजा दिलाए जाने की मांग की। किसानों ने गंगा एक्सप्रेसवे निर्माण इकाई और नहर विभाग दोनों से मुआवजा दिलाने की मांग रखी। एसडीएम मिथिलेश त्रिपाठी ने किसानों की बात सुनी। उन्होंने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया। हल्का लेखपाल को मौके पर जाकर जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।