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VIDEO: नींबी के पूर्व छात्रों ने विदेशों तक भी बनाई थी पहचान, आजादी के पहले बना था स्कूल, अब ताला लगने की नौबत

सरेनी के प्राथमिक विद्यालय नींबी-प्रथम, जहां पढ़े हुए न जाने कितने ही छात्रों ने देश और विदेश में पहचान बनाई है। कभी इस स्कूल में हर कक्षा के कई सेक्शन चला करते थे। अब बच्चे कम होते जा रहे हैं। आजादी के पहले से संचालित यह स्कूल कम छात्र संख्या के आधार पर अब विलय के नाम पर बंद किया जा रहा है। इस बात से गांव के लोग ही नहीं, बल्कि बाहर रहने वाले पूर्व छात्र भी आहत हैं। विकास क्षेत्र सरेनी के नींबी गांव में तीन परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें प्राइमरी स्कूल नींबी-प्रथम, प्राइमरी स्कूल नींबी-द्वितीय और जूनियर हाईस्कूल नींबी शामिल है। नींबी-प्रथम में बच्चों की संख्या 34 है, जिसकी वजह से इस स्कूल का विलय गांव के ही दूसरे विद्यालय में कर दिया गया है। इसकी वजह से वर्ष 1923 में स्थापित प्राथमिक विद्यालय नींबी-प्रथम में ताला लटक रहा है। इस विद्यालय के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। इस विद्यालय में पढ़ने कई छात्रों ने देश-विदेश में पहचान बनाई है। नींबी के रहने वाले विवेक पांडेय बताते हैं कि उन्होंने खुद 1982 से 1985 तक इसी स्कूल में प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की थी। उस समय 300 से अधिक बच्चे पढ़ा करते थे। आसपास के कई गांवों से बच्चे आते थे, जिससे हर कक्षा के कई सेक्शन चलते थे। विद्यालय को संवारने का भी पूरा प्रयास किया गया, लेकिन गांव-गांव खुले प्राइवेट स्कूलों की वजह से सरकारी विद्यालयों में बच्चों की संख्या कम होती गई। नतीजा यह हुआ कि नींबा का सरकारी स्कूल बंद होने के कगार पर पहुंच गया।

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