सुशील यादव, खीरों (रायबरेली)। स्कूल में सुबह प्रार्थना के समय सभी बच्चे स्कूल पहुंचते हैं। पढ़ाई के साथ बच्चों को अंग्रेजी में बात करने के लिए अलग से कक्षा संचालित की जाती हैं। स्कूल में अनुशासन के साथ बच्चों को संस्कारों का बोध भी कराया जा रहा है। इस सरकारी स्कूल के बच्चे किसी कानवेंट स्कूल के बच्चों से कम नहीं हैं। ग्रामीण शिक्षकों के प्रयास की सराहना कर रहे हैं। शिक्षा का स्तर देख इस स्कूल में अपने बच्चे का प्रवेश दिलाने के लिए लोग प्रयास कर रहे हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं प्राथमिक विद्यालय खजुहा की। यह सरकारी विद्यालय अब कान्वेंट जैसा है। जनप्रतिनिधियों व अभिभावकों कि जागरूकता और शिक्षकों के प्रयास से यहां पढ़ाई का बेहतर महौल बन गया है। विद्यालय के 102 बच्चे पढ़ रहे हैं। शिक्षक सुमनलता, आशीष वर्मा व सचिन कुमार बच्चों को हिंदी के साथ अंग्रेजी भाषा में विद्यार्थियों को पारंगत कर रहे हैं। इंचार्ज प्रधान शिक्षिका सुमनलता का कहना है विद्यालय एक परिवार है। विद्यालय चलाने के लिए प्रधान, अभिभावक व बच्चों के सहयोग की जरूरत होती है। हमारा कर्तव्य है कि बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए काम करें। स्कूल में बच्चे अनुशासन में रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल से आने के बाद बच्चे खुद अपना होमवर्क करने लगते हैं।