गंगा के जलस्तर में गिरावट आने से लोगों को बाढ़ से राहत मिली है, लेकिन संक्रामक रोग फैलने का खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों के मुताबिक पानी मंझाने के कारण फंगस रोग हो रहे हैं। वहीं धान और सब्जी की फसलों भी खेतों में पानी भरने से बर्बाद हो रही हैं। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है। इससे कुछ राहत मिली है। शुक्रवार को गंगा का जलस्तर 98.840 मीटर पर रहा। पानी स्थिर हो गया है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक यही जलस्तर स्थिर रहा तो जलस्तर हर दिन घटेगा। उधर पानी बढ़ने से जो स्थितियां बनी हैं, उसने कटरी के गांवों में रहने वाले लोगों की समस्याओं को बढ़ा दिया है। बाढ़ प्रभावित जमाल नगर मोहद्दीनपुर, अमबहा, बबुरा, जहांगीराबाद के ग्रामीणों का कहना है कि 50 बीघे सब्जी व लगभग 500 बीघा धान की फसल बर्बादी की कगार पर है। गांव वालाें का यह भी कहना है कि पानी से होकर पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करनी पड़ रही है। गांव के चारों ओर जल भराव होने से ग्रामीणों में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ है। गांव के महादेव, साजन यादव, सुखलाल व बाबूलाल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से बाढ़ पीड़ित गांव में दवाओं की किट बांटने का दावा किया किया जा रहा है, लेकिन गांव किट नहीं बांटी गई। जमाल नगर मोहद्दीनपुर के सुरेंद्र कुमार, रामशंकर, दुलारा, हिमांशी व जयकारा समेत करीब 12 लोग बुखार से पीड़ित हैं। बाढ़ के पानी से पैरों व हाथों में फंगस हो गया है।