यूपी के रायबरेली में महाकुंभ को लेकर शास्त्रों में वर्णित है कि जहां अमृत छलका था, वहीं महाकुंभ है। दुनिया में विष फैला हुआ है, मनुष्य के भीतर भी विष और अशांति है, उसे खत्म करने का काम महाकुंभ करेगा। यह महाकुंभ भारत की खोई हुई गरिमा को वापस करेगा। कोई आईआईटी से पढ़कर सत्य की खोज के लिए निकल पड़ा है तो वह गलत कैसे हो सकता है? अध्यात्म और सच की खोज ने ही रत्नाकर से बाल्मीकि को बनाया। बुद्ध ने अंगुलीमाल को बुद्धत्व की राह दिखाई। यह बात राष्ट्रीय संत सदगुरु ऋतेश्वर जी महाराज ने शहर के सुपर मार्केट में भेंट के दौरान कही। ऋतेश्वर महाराज ने कहा कि महाकुंभ आनंद की प्राप्ति करा रहा है। यह ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म का संगम है। जब जन सेवक इस तरह के आयोजन को भव्यता कि रूप देते हैं तो महाकुंभ का स्वरूप बड़ा हो जाता है। महाकुंभ में यदि दुनिया की दौलत लुटा दी जाए तो भी कम है।