तराई के पीलीभीत जिले में नहाय खाय के साथ ही छठ महापर्व की धूम शुरू हो गई। पूर्वांचल और बिहार से आकर शहर सहित जिले में कई स्थानों पर निवास करने वाले परिवारों में पर्व को लेकर खासा उत्साह दिखा। शनिवार को घाटों पर साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और वेदियों का रंग-रोगन किया गया। महिलाओं ने पूजन सामग्री खरीदी। शहर में बरहा रेलवे क्रॉसिंग के निकट स्थित सरोवर की सफाई कराई जा रही है। वेदियों की साफ-सफाई का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। यहां पर रेलवे कॉलोनियों और रामनगर में पूर्वांचल और बिहार के काफी लोग रहते हैं। पर्व को लेकर उनके रिश्तेदार भी यहां पहुंच चुके हैं। इन परिवारों में रसोई गैस सिलिंडर और चूल्हा का उपयोग इस पर्व पर नहीं किया जा रहा बल्कि गोबर के उपले और आम की सूखी लकड़ी जलाकर प्रसाद को तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। इससे पहले गेहूं को धोने के बाद धूप में सुखाया और घर की चकिया में उसकी पिसाई की। जिस सरोवर के जल में खड़े होकर व्रती महिलाएं सोमवार को सायं अस्ताचलगामी और मंगलवार को सुबह उदीयमान सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करेंगी, उसमें स्वच्छ एवं ताजा पानी भरने की तैयारी हो रही है। सोमवार की शाम सरोवर तट पर मेले जैसा दृश्य रहेगा। छठ पूजा तैयारी की देखरेख कर रहे उमेश कामती और सुदेश कुमार ने बताया कि शनिवार को नहाय खाय के साथ व्रती महिलाओं ने अपना अनुष्ठान शुरू कर दिया है। रविवार को गन्ने के रस या गुड़-चावल से तैयार खीर (खरना) का प्रसाद के तौर पर सेवन करने के उपरांत महिलाओं का 36 घंटे का निर्जल व्रत शुरू हो जाएगा।