बेटियों के प्रति परिवार के लोगों को भी अपनी सोच बदलनी चाहिए। बेटियों को बेटों की तरह आजादी और प्रोत्साहन मिलेगा, तो महिला सशक्तीकरण के लिए आवाज नहीं उठानी पड़ेगी। बेटियों को स्वतंत्र रूप से अपने निर्णय लेने दें। अभिभावक उन पर अपनी मर्जी न थोपें। ये बातें बुधवार को अनगढ़ स्थित ओपस इंटरनेशनल स्कूल में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित संवाद में वक्ताओं ने कहीं।