एक समय जीवनदायिनी रही बूढ़ी गंगा नदी आज रासायनिक कचरे की धार बनती जा रही है। मेरठ से सटे हस्तिनापुर वन अभ्यारण क्षेत्र से होकर गुजरने वाली इस नदी में पिछले कई दिनों से लगातार केमिकल युक्त पानी का प्रवाह हो रहा है। इससे न सिर्फ नदी का जैविक संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि नदी किनारे बसे किसानों की फसलें भी पूरी तरह बर्बाद हो रही हैं। खादर क्षेत्र के दर्जनों किसानों ने बताया कि उन्होंने नदी से सिंचाई के लिए जो पानी लिया, उससे गन्ने की फसल झुलस गई। यहां तक कि जहां भी इस पानी को निकाला गया, मिट्टी की उपजाऊ शक्ति खत्म हो गई। जलीय जीवों के लिए भी यह रासायनिक पानी जानलेवा बन गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि नदी में मछलियों की संख्या कम हो गई है और मृत जलचर तटों पर बहकर आ रहे हैं। यह धारा जनपद मुजफ्फरनगर से मेरठ तक बहती है और अब गांवों के घरों में नलों के जरिए भी पीला पानी आने लगा है, जिससे गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों द्वारा बार-बार शिकायत करने के बावजूद, अभी तक न प्रशासन और न ही वन विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई की गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुजफ्फरनगर की टीम ने पानी के सैंपल लेकर जांच शुरू की है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि यह केमिकल युक्त पानी किस स्रोत से आ रहा है। वन विभाग भी मामले में चुप्पी साधे बैठा है, जिससे लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।