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Meerut: वैराग्य के बिना मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं-भाव भूषण

मेरठ से सटे हस्तिनापुर में प्राचीन दिगंबर जैन बड़ा मंदिर स्थित स्वर्णमयी पंचमेरू नंदीश्वरद्वीप जिनालय में आषाढ़ अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर आयोजित श्री 1008 नंदीश्वरद्वीप महामंडल विधान श्रद्धा और भक्ति के साथ जारी है। गुरुवार को विधान के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने मांडले पर द्वितीय वलय के अर्घ्य समर्पित कर धर्मलाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रात: जाप्य अनुष्ठान से हुआ। इसके बाद भगवान शांतिनाथ का विधि-विधान से अभिषेक किया गया। मुनि 108 भाव भूषण महाराज ने प्रवचन में कहा कि सिद्ध परमेष्ठी के आठ मूल गुण होते हैं। पंच परमेष्ठियों में सिद्ध परमेष्ठी सर्वोच्च पूज्य हैं और तीन लोकों से ऊपर स्थित सिद्धशिला में विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि नंदीश्वरद्वीप विधान के माध्यम से अरिहंत भगवान के गुणों का स्मरण और आराधना करने से आत्मा भी परमात्मा बनने की दिशा में अग्रसर होती है। धीर और वैराग्यवान पुरुष अल्प ज्ञान के बावजूद सिद्धि प्राप्त कर सकते हैं, जबकि वैराग्य से रहित व्यक्ति सभी शास्त्रों का अध्ययन करने के बाद भी मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता। वीतरागता की प्राप्ति के लिए सम्यक चारित्र का होना अनिवार्य है। विधानाचार्य पंडित आशीष जैन शास्त्री ने विधान की समस्त मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराईं।

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