एक पल को पैर ठिठकते हैं... तलवों का दर्द चेहरे पर उतर आता है। साथी पानी की बोतल बढ़ाता है, कोई पैरों पर पट्टी बांधता है और अगले ही पल वही कदम फिर सड़क पर दौड़ने लगते हैं। न थकान रोक पा रही है, न छाले और न मौसम की तपिश। आंखों में सिर्फ एक मंजिल है-शिवालय और भोलेनाथ का जलाभिषेक। दिल्ली-देहरादून हाईवे पर डाक कांवड़ियों की यह दौड़ इन दिनों आस्था, संकल्प और समर्पण की तस्वीर बन गई है। दर्द से ज्यादा जरूरी है संकल्प हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे डाक कांवड़ियों के लिए यह सफर केवल दूरी तय करने का नाम नहीं, बल्कि संकल्प पूरा करने की दौड़ है। शिवरात्रि नजदीक आने के साथ हाईवे पर डाक कांवड़ियों की संख्या भी बढ़ गई है। कई दल निर्धारित समय में शिवालय पहुंचने के लिए लगातार अपनी रफ्तार बनाए हुए हैं। लंबी दूरी तय करने के बाद पैरों में छाले पड़ते हैं, तलवों में दर्द होता है और शरीर आराम मांगता है। ऐसे में कुछ पल रुककर दर्द सहलाया जाता है, पैरों पर पट्टी बांधी जाती है और फिर कांवड़िए उसी जोश के साथ दौड़ पड़ते हैं। दर्द है, थकान है... लेकिन उससे कहीं बड़ा है भोलेनाथ तक पहुंचने का संकल्प।