घोसी नगर के बड़ागांव शिया मोहल्ले में मुहर्रम का चांद नजर आते ही अकीदतमंदों के बीच गम का माहौल शुरू हो गया। चांद रात पर अंजुमन मसूमिया कदीम के अजाखाने सहित अंजुमन सज्जादिया, मसूमिया, इमामिया और हुसैनी मिशन द्वारा मजलिसों का सिलसिला शुरू किया गया। घरों पर काले परचम लगाए गए, जिन्हें गम और शहादत की याद का प्रतीक माना जाता है। मजलिसों में इमाम हुसैन और कर्बला के 72 शहीदों को याद करते हुए नोहाखानी और मातम किया गया। अकीदतमंदों ने बताया कि मुहर्रम के दो माह दस दिन तक शिया समुदाय खुशी के कार्यक्रमों से परहेज कर गम-ए-हुसैन मनाता है।